शुक्रवार, अगस्त 29, 2025
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्म आरती के साथ जाने मंदिर से जुडी रोचक कहानी

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग : हिन्दू राष्ट्र में महाकाल के अनेकों मंदिर स्थापित हैं, जहां पर हर दिन सैकड़ो लोगो की भीड़ इक्कठा होती है। उनमे से ही एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर है, जोकि मध्य प्रदेश के उज्जैन राज्य में स्थित है। हिन्दू धर्म के अनुसार यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक हैं, इस मंदिर को तीसरे नंबर का दर्जा दिया गया है। इस मंदिर को शिव जी का निवाश स्थल माना जाता है। इस मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग का मुख दक्षिण दिशा की तरफ है, अन्य ज्योतिर्लिंग मंदिर की रचना इससे पूरी तरह अलग हैं। इस मंदिर में भस्म आरती एक अनोखी पूजा विधि है जोकि अन्य मंदिरों में नहीं देखी जा सकती, इस आरती के दौरान पूजा विधि में शमसान घाट में मौजूद राख का उपयोग किया जाता है। एक मान्यता के अनुसार इस आरती के समय महिलाओं का वहां पर होना वर्जित है, क्यूंकि यह पल महिलाओं के लिए अशुभ मना जाता है। इसी तरह के अनोखे रहस्यों को जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरुर पढ़ें।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की महत्वपूर्ण बातें (Mahakaleshwar Tample Importance)

हिन्दू धर्म में महाकाल के भक्तगणों के लिए इस मंदिर का विशेष महत्व है, क्यूंकि यहाँ पर भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग को स्थापित की गई है। राजा भोज ने महाकालेश्वर मंदिर का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलवा आपको मंदिर से जुडी कुछ विशेष बातों को अवश्य जानना चाहिए, जोकि इस मंदिर के बारे में अनेकों चीजों का प्रमाण देती है। जानने के लिए निचे तालिका में पढ़ें।

मंदिर का नाममहाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन
सम्बंधित धर्महिन्दू धर्म
मंदिर के प्रमुख देवताभगवन शिव शंकर (महाकालेश्वर)
स्थानउज्जैन (मध्यप्रदेश, भारत)
मंदिर के संस्थापकस्वय्म्बू, जीर्णोद्वारक, और राजा भोज
संस्थपना का समय कालप्राचीन युग
मंदिर के प्रमुख त्यौहारसावन मास, कुम्भ मेला, नागपंचमी
मदिर की वस्तुकला शैलीमराठा शैली, भूमिजा शैली, चातुक्य शैली
मंदिर खुलने का समयप्रातः काल 4 बजे से रात को 11 बजे तक
मंदिर का प्रमुख भागमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य (Mahakaleshwar Mandir Facts)

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर वहां पर स्थापित ज्योतिर्लिंग से जाना जाता है, इस मंदिर के किनारे एक विशालकाय झील है, जिसमे स्नान करने से भक्तों के हर पाप धुल जातें है। यहां पर मंदिर से जुड़े ऐसे अनेकों रोचक तथ्य बताये गए हैं जिनके बारे में शायद आप ना जानते हों। ऐसे ही कुछ अनसुने रोचक तथ्य आपके साथ शेयर करने वाले हैं, इन्हें आगे पढ़ सकते हैं।

  • एक रहस्यमयी रोचक तथ्य के अनुसार उज्जैन के इस मंदिर में कोई भी राजा और मंत्री रात भर नहीं रुक सकता, ऐसा करने पर वह दंड का भागीदार माना जाएगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस मंदिर पर सिर्फ एक ही देव का शासन है, वह हैं स्वयं महाकाल।
  • महाकालेश्वर के इस मंदिर में हर 12 वर्ष के बाद कुंभ का मेला आयोजित किया जाता है, इस मेले में विभिन्न देशों के साधु और संत आते हैं, इसके साथ ही यहां पर काफी मात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित होती है।
  • इस मंदिर के गर्भग्रह में माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं स्थापित की गई है, जिसके दर्शन मात्र ही मन की हर दुविधाएं दूर हो जाती हैं।
  • महाकालेश्वर के इस मंदिर को तीन भागों में बांटा गया है जिसमें सबसे नीचे महाकालेश्वर, बीच में ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर नागचंदेश्वर मंदिर की रहस्यमय तरीके से रचना की गई है।
  • इस मंदिर के उच्चतम भाग अर्थात नागचंदेश्वर मंदिर का द्वार साल में सिर्फ एक बारी खोला जाता है। इस समयकाल के दौरान महाकालेश्वर के भक्त नागचंद्रेश्वर देवता के दर्शन कर सकते हैं।
  • एक प्राचीन मान्यता के अनुसार महाकालेश्वर के इस मंदिर में समशान की राख से देवताओं का श्रृंगार किया जाता था। लेकिन बदलते समय के अनुसार इस प्रथा को खत्म कर दिया गया और अब गाय के गोबर, पीपल के पत्ते, पलाश बेर की लकड़ी को देवताओं पर चढ़ाया जाता है।

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की कहानी (MahakaleshwarTemple Story)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बारें में तो आपने कई जगह पढ़ा होगा! लेकिनं आप इस मंदिर से जुडी अनोखी कहानी के बारे में कुछ भी नहीं जानते तो आगे पढ़ें-

प्राचीन काल में उज्जैन में अवंतिका नाम की एक नगरी होती थी। इस नगरी में एक ज्ञानवान शिवभक्त ब्राम्हण के रूप में निवास करता था। इस ब्राम्हण का नाम वेदप्रिय था। इस ब्राम्हण के चार आज्ञाकारी पुत्र थे। ब्राह्मण के चारों पुत्र भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे। उनके सभी पुत्र शिवलिंग की स्थापना करके उसकी पूजा आराधना करते थे।

वहीं दूसरी तरफ रत्नमाल पर्वत पर दूषण नाम का राक्षस निवास करता था। इस राक्षस को ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त था, लेकिन यह राक्षस वरदान का गलत इस्तेमाल करता था। यह राक्षस अपने नजदीकी क्षेत्र में बसे धार्मिक लोगों को बहुत परेशान करता था, और उन पर अत्याचार करता था। एक बार इस राक्षस की नजर अवंतिका नगर में स्थित ब्राह्मण के ऊपर पड़ी, तब से इसने उस ब्राह्मण को परेशान करना शुरू कर दिया।

यह राक्षस ब्राह्मण के पूजा पाठ में अवरोध डालता था। आसपास के सभी ब्राह्मण लोग इसके द्वारा किए गए कुकर्मों से परेशान हो चुके थे। व्याकुलता से पीड़ित सभी ब्राह्मण एकजुट होकर भगवान शिव से रक्षा हेतु प्रार्थना करने लगते हैं। सभी ब्राह्मणों की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव साक्षात प्रकट हो जाते हैं, प्रकट होने के बाद भगवान शिव ने राक्षस भूषण का वध करने का वचन दिया। परिणाम स्वरुप भगवान शिव ने अपनी शक्ति से उस राक्षस को भस्म कर दिया।

राक्षस भूषण का वध होने के बाद ब्राह्मणों ने भगवान शिव से उसी स्थान पर स्थापित होने की प्रार्थना की, जिससे कि भविष्य में उन्हें कोई राक्षस परेशान ना कर सके। ब्राह्मणों की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव उसी जगह ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजित हो गए तब से उस जगह का नाम महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पड़ गया।

इस तरह से भविष्य में जाकर यह मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के रूप प्रसिद्ध हो गया।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से जुड़े प्रमुख त्यौहार (Mahakaleshwar Temple Related Festival )

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को भगवान शिव का आसन माना जाता है, इसी वजह से शिव जी से जुड़े अनेकों पर्व को यहाँ पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इन सभी पर्वों के दौरान मंदिर में श्रधालुओं की भरमार रहती है। क्यूंकि इस शुभ अवसर पर भगवान शिव का आशीर्वाद लेना शुभ मना जाता है, इस दिन भक्त अपनी मन की मनोकामनाएं हेतु इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आते हैं। चलिए इन सभी प्रमुख त्योहारों के बारे में जाने।

कुम्भ मेला

कुम्भ मेला विश्व भर में सबसे बड़ा मेला माना जाता है, क्यूंकि यह पर्व 12 सालों में सिर्फ एक बार ही होता है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में यह मेला लगभग 1 महीने तक चलता है। इस मेले के दौरान हजारो श्रधालूं और साधू, संत यहाँ पर एकत्रित होते हैं।

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि भगवान शिव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है, देव युग में इसी दिन महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसी कारण महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि जैसे पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

कार्तिक मेला

हिन्दू धर्म के अनुसार कार्तिक मेला नवम्बर और दिसम्बर के मध्य पड़ता है। उज्जैन के निवासी इस त्यौहार को बड़ी धूमधाम से मानते हैं। महाकालेश्वर मंदिर में इस त्यौहार के प्रमुख अवसर पर पूजा अर्चना की जाती है।

सावन माह

सावन महीने में भारत के हर छत्रों में भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। इस महीने में महाकालेश्वर मदिर पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है, इसके साथ ही इस महीने में महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन करने से सभी मनोकामनाए पूर्ण हो जाती हैं।

नित्य यात्रा

इस पर्व के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर के नजदीक स्तिथ शिप्रा नदी में स्नान किया जाता है और इसके बाद ही मदिर के अंदर मौजूद ज्योतिर्लिंग का दर्शन किया जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव अपने भक्तों से प्रसन्न होते हैं।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में स्थित वस्तुकलाएं

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में मूर्तियों को बेहद बारीकियों से निर्मित किया गया है। इस मंदिर में मौजूद विशालकाय मूर्तियों की रचना हेतु मराठा, भूमिजा और चालुक्य शैलियों का खूबसूरत उपयोग किया गया है। यहां पर मंदिर की दीवारों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की तस्वीरें देखी जा सकती है। महाकालेश्वर मंदिर के बाहरी द्वार पर काले संगमरमर से बने बैलों का दृश्य देखा जा सकता है।

इस मंदिर में एक छोटा सा जलस्रोत लगा है, जो देखने में बेहद ही खूबसूरत है, इस जलस्रोत को कोटितीर्थ नाम से जाना जाता है। मंदिर के गर्भग्रह में खूबसूरत सीढ़ियां देखी जा सकती है जिसके जरिए ओंकारेश्वर मंदिर की तरफ प्रस्थान किया जा सकता है। सावन महीने के अंतर्गत इस मंदिर को विशेष रूप से सुसज्जित किया जाता है क्योंकि इस दौरान श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जमा हो होती है। इस मंदिर के एक कक्ष में भगवान श्री राम और देवी अवंतिका की प्रतिमा देखी जा सकती है, जहां पर इन देवी देवताओं की पूजा की जाती है। इस मंदिर के गर्भग्रह में एक विशेष स्थान पर महाकालेश्वर का ज्योतिर्लिंग स्थित है जिसके समीप ऐसे दो दीपक स्थित है, जिनको हमेशा जलता हुआ देखा जा सकता है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर कैसे पहुंचे

अगर आप महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन इच्छुक हैं, तब आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि “मैं अपने स्थान से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर तक कैसे पहुंच सकता हूं?” परिणामस्वरूप मंदिर के दर्शन करने के लिए तीन तरीकों से यहां पर पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन का सफर :

महाकालेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए आप ट्रेन का टिकट बुक कर सकते हैं, क्योंकि उज्जैन में स्थित इस मंदिर के नजदीकी लोकल रेलवे स्टेशन मौजूद है। जानकारी के लिए बताना चाहेंगे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से यहां पर डायरेक्ट ट्रेन चलती हैं। मंदिर के नजदीक उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन मौजूद है।

रोड का सफर :

अगर आप इस मंदिर के दर्शन हेतु सड़क द्वारा जाना चाहते हैं, तो जानकारी के लिए बताना चाहेंगे आप नेशनल हाईवे 48 और नेशनल हाईवे 52 की मदद से इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं। मंदिर के नजदीक भरत सिंह मार्ग रोड और हरी फाटक ओवर ब्रिज मौजूद है।

फ्लाइट से सफर :

अगर आपके पास समय की कमी है, और आप इस मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तब फ्लाइट द्वारा इंदौर में स्तिथ एयरपोर्ट को टिकट बुक करा सकते हैं। इंदौर एयरपोर्ट से मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको टैक्सी की मदद लेनी पड़ती है। एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी लगभग 58 किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने के लिए करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लग सकता है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन का समय

अगर आप महाकालेश्वर मंदिर जाने का प्लान कर चुके हैं, और इस मंदिर के दर्शन हेतु तैयारिया कर रहें हैं, तब आपको इस मंदिर के खुलने से लेकर बंद होने तक सभी जानकारी होनी चाहिए। अगर आप सही समय पर मंदिर तक नहीं पहुच पाते तब आपको भीड़ जैसे परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आपकी इसी समस्या को ध्यान में रहते हुए, मंदिर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण समय को आपके साथ शेयर करेंगे।

सुबह की पूजा का समय : 7 बजे से 7:30 बजे तक

मध्यकाल पूजा का समय : 10 बजे से 10:30 बजे तक

शाम की पूजा का समय : 5 बजे से 5:30 बजे तक

आरती का समय : शाम 7 बजे से 7:30 बजे तक

मंदिर बंद होने का समय : रात 11 बजे

इस समय सारणी के अनुसार आप मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकतें हैं। हलाकि मंदिर का गेट सुबह 4 बजे ही खुल जाता है, किन्तु भक्तगण मंदिर में 6 बजे के बाद ही प्रवेश कर सकते हैं।

FAQ

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में किस देवता के लिए जाना जाता है?
महाकाल शिव शंकर।

महाकालेश्वर मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु सही समय क्या है?
महाकालेश्वर मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सही समय सुबह 6 बजे से लेकर 12 बजे तक है।

महाकालेश्वर मंदिर में रात के समय ठहरना उचित क्यूँ नहीं माना जाता?
महाकालेश्वर मंदिर में रात के समय किसी के रुकना अशुभ मन जाता है, इससे जीवन में अनेकों विपदाओं का सामना कर पद सकता है।

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती महिला क्यूँ नहीं देख सकती हैं?
क्यूंकि भस्म आरती के दौरान भगवान शिव निराकार रूप में होते हैं, जो कि महिला के लिए अशुभ पल माना जाता है।

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